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Thursday, November 18, 2010

Netikta -- Fruit of Drishtikon!!!


बचपन की हिदयेतें
माँ की सिख
पापा की नशिहत
गुरुओं की शिक्षा
और ये बाहरी ज्ञान
सब मिलकर निर्माण करते हैं : मन की सोच
और फिर धीरे - धीरे 
बुद्धि के विश्लेषण से....
जागृत होती है....
नेतिकता  की समझ....
और फिर इस सही - गलत के
मायाजाल में उलझा बचपन 
कभी बहार आ नहीं पता....
हम सदा अपनी सिख, नशिहत, शिक्षा और ज्ञान पर यकीन कर....
सही गलत का निर्णय लेते हैं....
और ये कभी नहीं सोचते की 
क्या हमारी नेतिकता भी हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करती है?????
क्या हमरी सोच हमरे ज्ञान की उपज है???
क्या सोच का सिमित होना हमारी नैत्कता के संकरे होने का कारन है???

सायद ये प्रश्न मेरी सोच ,,,,,
मेरी दृष्टिकोण की दें है.......
आपका दृष्टिकोण क्या है इन सवालों की और?????????????????




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