;

Friday, October 14, 2011

Tum ho !!! Ho Kya Tum ????

कुछ गीत .... उनके शब्द !!! ना जाने क्यों खुद में ही एक पूरी कहानी छिपाए बेठे रहते हैं....!!!
उसकी साज़- सुर-शब्द सब ऐसे लगने लगते हैं जैसे कुछ पूरा होकर भी अधुरा सा है...
एक अनजाना खालीपन.... नितांत शांति.... घोर अँधेरा... सब समेटे बेठे होते हैं कुछ गीत!!!!!

ऐसा ही एक गीत सुना है आज.... पूरा दिन सुना... सुन कर ना जाने कितने जाने - पहचाने चेहरे आँखों के सामने से गुज़रे..... इस गीत को सुनकर कुछ ख्याल उमड़े मन में.. यहाँ उन्ही उलझे सुलझे ख्यालों को संजो रही हूँ.... 

"बुझती शाम....अकेला चाँद....उसी टीले पर तनहा मैं इंतज़ार करता हूँ तेरा आज तक....कहीं से खबर आई है , मेरी मौत का दिन तय हो चूका है....एक आखिरी शाम कल सुबह से पहले.... ये शाम कुछ उस वैसी ही है तेरे जाने के पहले वाली शाम जैसी.... उस दिन जैसा खुबसूरत चाँद फिर कब निकला ???? तुम ही बतलाओ...???? दिल में अनेक सुराख़ हो गए हैं.... लगता है तेरी डांट के बाद पि गयी हर सिगरेट मेरे दिल को छलनी कर गयी है.... इन सूराखो का आकर दिन बी दिन बढ़ता जा रहा है.... तेरी यादों की तरह ही.... 

ऐसी ख़ामोशी मेरे ज़ख्मो को और हरा कर देती है.... ये कैसा गीत है.... ज़ख्मो पर टांको सा काम कर रहा है ये सुर...शब्द मरहम लगा रहे हैं..... आवाज़ का एक दरिया है.... जो भर रहा है...मेरे खालीपन के सागर को.... ये पत्थर कितने पुराने हैं.... पर आज भी तेरी गोद में सर रखकर लेटने का सुख दे रहे हैं...ये चलती हवाएं मानो मेरे माथे पर हाथ फिरा रही है... ज्यों तुम किया करती थी कभी... फिजाए हलकी हलकी सी थपकियाँ भी दे रही हैं ... पर आज ये चांदनी चुभ रही है मेरी आँखों में... तुम्हारी आँखें में ठीक से देख नहीं पा रहा... आकर फिर से अपने जुड़े की पिन खोल कर चाँद का पर्दा कर दो... तेरे बालों में वो कौन सी खुसबू बसती थी... तुम पास होती थी ..सो सब शांत हो जाते थे. मन का गहरा समुन्दर भी,चुपचाप वापस लौट आता था... किनारों पर बिना कोई हिलोरे मारे... परर्रर्रर .....................................

आज सोचता हूँ वैसी शांति में मर जाना कितना सुकून देगा.... तुम जरूर परियों की नगरी से आई थी...वर्ना तुम्हारे आंसूं में वो कौन सी दुआ थी , जिससे ज़ख्म भर जाते थे...तुम वही कहानियों वाली लड़की हो ना जिसके नैनों में अमृत भरा रहता था.... जो लोगों को जीवनदान देती थी... तभी तो जब तुम अपने होठ मेरे माथे पर रखती तो साड़ी चिंताएं बस कहीं खो जाती थी... आँखों को चूमती थी ...सायद इसीलिए आजतक मेरी आँखों में आंसूं नहीं आते... 

ना जाने मेरी खुशियों की किताब को तुम कहाँ ले गयी हो???? तेरे जाने के बाद जो भी किताब मिली सब में बस दर्द ही था... कभी लोग मिलते मिलते बीछर  गए...कभी मिले ही नहीं.... तुम बिन सब जगह बस भूख , गरीबी, दर्द , आंसूं ... देखे.... सड़के मिली जो दीवारों पर जाकर ख़त्म हो गयी... सुनी आँखों से रोता हूँ... मेरी उचाइयां तो तुमसे ही थी... आज तेरे नैनो  में पनाह मांगता हूँ...ज़िन्दगी बस आज भर की है.... क्या ज़िन्दगी भर के लिए आ जाओगी मेरे पास तुम??? इतना काफी होगा... चैन से मरने के लिए... बोलो आओगी क्या??"










3 comments:

  1. Wow!!!! amazing use f wrds.................

    chori badi ho gayi hai!!!!!

    ReplyDelete
  2. Wow!!!! Speechless....

    You can make images wid ur words...

    For a second i was able to feel this pain and strangely i was also enjoyng it,...

    SUPERB!!!

    Its one f your bst post.... :)

    ReplyDelete
  3. Oh!!! I was sooooooooooooooooooooooooooo lost in your wrds dat i frgt to mention dat song is also superb!!!!

    ReplyDelete

Translate