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Monday, January 30, 2012

सुनो ! अब किसी की मत सुनना


सुना था
की डर के आगे जीत है

फिर सोचा
की जीत के आगे क्या है
डर ????
नाम का
इज्ज़त का
हार का??????

सुना था
जब अपनी समझ जवाब ना दे
किसी ज्ञानी को ढूँढना चाइये
पर
इस पर भी कई प्रश्न उठ गए
की आखिर ज्ञानी कौन है...
वो जो जीता है?
या
वो जो हारा है?

सुना था
की सुननी सबकी चहिये
पर करनी अपनी मन की ही होनी चहिये...
पर....
जब मन जवाब ना दे तो????

सुना था
की आत्महत्या पाप है
पर बोझ की तरह साँसे लेकर जीना
क्या पुण्य कहलाएगा???

सुना था
की पत्ता भी नहीं हिलता उसकी मर्ज़ी के बिना
पर दुनिया का ये हाल उसकी
मर्ज़ी नहीं हो सकता ....

सुना था
की वक़्त कभी नहीं रुकता
पर कई लम्हों को ठहरते देखा
कितनी तस्वीरों में .....

सुना था
की खोजने से तो खुदा भी मिल जाता है
पर खोज जारी है
लेकिन संसार से गायब शांति अब तक लापता है....

आज सोचती हूँ की
हमे सुनना ही नहीं था!!!
सोचती हूँ की
सबसे कह दूँ की...
सुनो! अब किसी की मत सुनना!! 






2 comments:

  1. soch lo..
    hum to sabse zyada tera hi sunte hain..
    phir mat bolna ki suna nahi...LOLzzzz... :)

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    1. Soch lia nahi bolenge
      mera mat sun...but jiska sunna hai wo tu chahe nahi bhi sunna chahe to bhi sunna padega.... lolzzz :)

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