मेरी दादी सिखाती है मुझे
सही नाप-तौल
मसालों का...
कितना तेल डालना है
आम के आचार में...
अगले घर जो जाना है।
सोचती हूँ,
की कभी तो वो दिन भी आएगा
जब दादियाँ सिखायेंगी
कोई नुश्खा...
ज़िन्दगी का आचार डालने वाला
बिना अगले घर की चिंता किए?
कूट कर मिलाई इलाइची
दस गुना बढ़ा देती है
खुशबू खीर की।
दालचीनी के कुछ टुकड़े
जादू जगा देते हैं
कॉफी के कप में।
माँ की रेसिपी डायरी
भरी परी है
ऐसी टिप्स से
जिन्हें वो गांठ बांध देंगी
मेरे आँचल से
विदाई के वक़्त...
ना जाने कब वो दिन आएगा
जब माँएं गाँठ बांधेंगी
एक कर्तव्य
माएके के लिए भी?
सिर्फ खाना बनाना नहीं
ढंग से लगाना भी
जरुरी है।
रसमलाई के साथ
दहीबड़े नहीं डाले जाते...
चटनी अंत में लगाओ
वरना पानी छोड़ देगी...
ना जाने कब से
समझा रही हैं
मेरी बहनें,
पति के
दिल का रास्ता
उसके पेट से होकर जाता है।
ना जाने कब वो दिन आएगा
जब बहनें सिखाएंगी की
पाने को
और भी कई मंजिलें हैं
पति के दिल के अलावा?
"उन्हें" खाने में
पनीर पसंद है
तीखे स्वाद वाली...
है कोई ऐसी रेसिपी
तेरे पास?
पता है उन्हें चीस से
एलर्जी है,
पर पिज्जा पसंद है ...
क्या करूँ?तू कुछ बता...
मेरी ब्याही सहेलियाँ
ऐसी हीं बातें करती हैं।
ना जाने कब वो दिन आएगा
जब मेरी ऐसी किसी दोस्त के
"वो"
पुछेंगे
क्या पसंद है उसे ?
तुम दोस्त जो हो उसकी।
ना जाने ऐसा दिन कब आए
जब दादी-नानी सुनाएंगी
कहानियाँ
अमृता प्रीतम की
साथ
सफ़ेद घोड़े पर आने वाले राजकुमार के।
जब माँएं नहीं सिखायेंगी
सर झुका कर चलना,
जोर से नहीं हँसना,
अपनी बढती बेटियों को।
जब बहनें कहेंगी
एक झापड़ रसीद करने को
सड़क किनारे वाले मनचलों को,
जी भर को देने गालियाँ
मोबाइल पर
परेशान करने वाले को।

जब सहेलियाँ साथ देंगी
बन कर गवाह
घर से भाग कर
की गई शादी में।
-----
क्या कहते हैं
है कोई उम्मीद?
ऐसा कोई दिन आएगा.कभी?
सही नाप-तौल
मसालों का...
कितना तेल डालना है
आम के आचार में...
अगले घर जो जाना है।
सोचती हूँ,
की कभी तो वो दिन भी आएगा
जब दादियाँ सिखायेंगी
कोई नुश्खा...
ज़िन्दगी का आचार डालने वाला
बिना अगले घर की चिंता किए?
कूट कर मिलाई इलाइची
दस गुना बढ़ा देती है
खुशबू खीर की।
दालचीनी के कुछ टुकड़े
जादू जगा देते हैं
कॉफी के कप में।
माँ की रेसिपी डायरी
भरी परी है
ऐसी टिप्स से
जिन्हें वो गांठ बांध देंगी
मेरे आँचल से
विदाई के वक़्त...
ना जाने कब वो दिन आएगा
जब माँएं गाँठ बांधेंगी
एक कर्तव्य
माएके के लिए भी?
सिर्फ खाना बनाना नहीं
ढंग से लगाना भी
जरुरी है।
रसमलाई के साथ
दहीबड़े नहीं डाले जाते...
चटनी अंत में लगाओ
वरना पानी छोड़ देगी...
ना जाने कब से
समझा रही हैं
मेरी बहनें,
पति के
दिल का रास्ता
उसके पेट से होकर जाता है।
ना जाने कब वो दिन आएगा
जब बहनें सिखाएंगी की
पाने को
और भी कई मंजिलें हैं
पति के दिल के अलावा?
"उन्हें" खाने में
पनीर पसंद है
तीखे स्वाद वाली...
है कोई ऐसी रेसिपी
तेरे पास?
पता है उन्हें चीस से
एलर्जी है,
पर पिज्जा पसंद है ...
क्या करूँ?तू कुछ बता...
मेरी ब्याही सहेलियाँ
ऐसी हीं बातें करती हैं।
ना जाने कब वो दिन आएगा
जब मेरी ऐसी किसी दोस्त के
"वो"
पुछेंगे
क्या पसंद है उसे ?
तुम दोस्त जो हो उसकी।
ना जाने ऐसा दिन कब आए
जब दादी-नानी सुनाएंगी
कहानियाँ
अमृता प्रीतम की
साथ
सफ़ेद घोड़े पर आने वाले राजकुमार के।
जब माँएं नहीं सिखायेंगी
सर झुका कर चलना,
जोर से नहीं हँसना,
अपनी बढती बेटियों को।
जब बहनें कहेंगी
एक झापड़ रसीद करने को
सड़क किनारे वाले मनचलों को,
जी भर को देने गालियाँ
मोबाइल पर
परेशान करने वाले को।
जब सहेलियाँ साथ देंगी
बन कर गवाह
घर से भाग कर
की गई शादी में।
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क्या कहते हैं
है कोई उम्मीद?
ऐसा कोई दिन आएगा.कभी?
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