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Friday, September 10, 2010

Phark Nazarie ka hai


" हम तो माँ के आँचल में ही  छुपकर रो लेते हैं ,.....
 कौन कहता है की पाप सिर्फ गंगा नहाने से ही धुलते हैं.. ......................


हम तो खुश हो जाते हैं बचों की हंसी से ही,........
कौन कहता है की खुशियाँ सिर्फ आलिशान बंगलों पर ही मिलती हैं.. ............................


हम तो सारे सपने पा लेते हैं अपनों के संग,.....
कौन कहता है की ऊंचाई पर इंसान अकेला होता है... ..........................


बस देखने , सोचने का फर्क है....


       देखो तो ,,,,, मूरत में भी इश्वर है
       सोचो तो,,,,,, माता - पिता भी भगवन!!!!!!
फर्क नज़रिए का है    ??????


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