अक्सर देखा है हमने,
सब देखते हैं..
दूर एकटक आसमान की ओर
तारों की नगरी में,
जब कोई अपना चला जाता है
ये दुनिया छोड़ ,
दूर!!!
कैसे सब कुछ भूल कर
एक-एक आंसू का अर्ध्य देकर
बस ताकते हैं शुन्य से
आसमां....
आखिर दूसरी दुनिया तो
आसमानों में ही बस्ती है ना
तारों के पास...
मर के लोग तारा ही तो
बनते हैं!!!
है ना??
पर
फिर क्यूँ उसके आंसू
पानी लगते हैं सबको???
क्यूँ उसका शुन्य
बेमानी लगता है सबको???
क्यूँ ...??
आखिर खोया तो उसने भी है
इंसान न सही ख्वाब
चुटकी चुटकी भर
हिम्मत से जोड़े हुए
मुठी भर ख्वाब...
वो भी तो मर ही गए है न...
तो क्यों नहीं रोने देता उसे...
क्यों नहीं खोने देता उसे...
बेचारी को तो ये भी
नहीं पता की...
टूटे ख्वाब..
अधूरी अभिलाषा...
बिलखते अरमानो
को कहाँ तलाशे....
क्या ख्वाब भी मर कर तारा बन जाते हैं????
बोलो
क्या ऐसा होता है क्या???
वैसे ख्वाबों का मरना भी तो जीवन की एक अमिट सच्चाई ही है ना???

You are too good wid wrds yaar..
ReplyDeleteKuch khwab dekhe the
humne inhi raahon pe..
aaj mod se dekha to
naa rahen dikhi
naa khwab
khwab begane
raahe anjaani
jo kuch saath hai bas
wo hai Aap!!..
tum samajh jaayegi...
I mean bth f us hv wrtn it fr d same prsn...
Am I ryt???
C s v lucky u knw...
bcz c hs frnd lyk u..
:)
thanx:)
Deletehmm samjh gaye...
Lucky to aap bhi kum nahi hain....
Am I ryt???
:)