होले से, धीरे से....
पलकों में घर बसाया तुने....
दिल की धडकने तेज होती हैं
तू सच में आया है
या फिर भ्रम हो गया मुझे !!!!!
जाना था, पहचाना था.....
आँखों के जरिये तुझे....
दिमाग के घोड़े दौड़ते हैं
तू सच मैं तू ही है
या फिर भ्रम हो गया मुझे!!!!
देखा है.... सुना है...
मन में हँसते - गाते तुझे...
नैना कुछ और कहती है
तू सच मैं खुश है
या फिर भ्रम हो गया मुझे!!!!
जिया है.... सिया है...
होठों पे सजा दर्द तुने,,,
भीतर एक नदी सी बहती है
तू सच में गुनगुनाता है
या फिर भ्रम हो गया मुझे!!!!
जोड़ा है.... बाँधा है...
निगाहों को अनजानी डोर से तुने..
यादों की पिटारी खुलती है
तू सच में सच नहीं है....
हाँ!!! बस भ्रम ही होता है मुझे!!!!!
--04.12.2009--

likha hai ki jiya hai????
ReplyDeletehar shabd kuch yun laga dil pe
ki sach !!!!
Hume Bhram sa ho gaya
tere pass hone ka..............
Bahut Achha....