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Saturday, September 17, 2011

सच सा भ्रम



होले से, धीरे से....

पलकों में  घर बसाया तुने....
दिल की धडकने तेज होती हैं
तू सच में आया है
या फिर भ्रम हो गया मुझे !!!!!

जाना था, पहचाना था.....
आँखों के जरिये तुझे....
दिमाग के घोड़े दौड़ते  हैं 
तू सच मैं तू ही है
या फिर भ्रम हो गया मुझे!!!!

देखा है.... सुना है...
मन में हँसते - गाते तुझे...
नैना कुछ और कहती है
तू सच मैं खुश है
या फिर भ्रम हो गया मुझे!!!!

जिया है.... सिया है...
होठों पे  सजा दर्द तुने,,,
भीतर एक नदी सी बहती है
तू सच में  गुनगुनाता है 
या फिर भ्रम हो गया मुझे!!!!

जोड़ा है.... बाँधा है...
निगाहों  को अनजानी डोर से तुने..
यादों की पिटारी खुलती है 
तू सच में सच नहीं है....
हाँ!!! बस भ्रम ही होता है मुझे!!!!!

--04.12.2009--









1 comment:

  1. likha hai ki jiya hai????
    har shabd kuch yun laga dil pe
    ki sach !!!!
    Hume Bhram sa ho gaya
    tere pass hone ka..............

    Bahut Achha....

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